TDS Under Income Tax Act 2025 Updates

TDS Under the Income Tax Act, 2025

What Has Really Changed in Deduction, Deposit, and TRACES?

अगर आप एक बिजनेस ओनर, अकाउंटेंट या टैक्स प्रोफेशनल हैं, तो आपके लिए एक बहुत बड़ा अपडेट है। भारत सरकार ने छह दशक पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 को पूरी तरह से विदाई दे दी है। इसकी जगह अब Income Tax Act, 2025 लागू हो चुका है।

इस ऐतिहासिक बदलाव के बाद टीडीएस (TDS) से जुड़े रोजमर्रा के नियमों, फॉर्म नंबरों और चालान के तरीकों में भारी बदलाव आया है। अच्छी बात यह है कि टैक्स की दरें (Tax Rates) और थ्रेसहोल्ड लिमिट्स नहीं बदली हैं, लेकिन काम करने का पूरा कानूनी तरीका बदल गया है।

आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि इस बार टीडीएस में असल में क्या-क्या बदल गया है और आपको अपने एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर में क्या बदलाव करने होंगे।

1. 194-Series का अंत: अब लागू होंगे सेक्शंस 392 और 393

अभी तक हम वेंडर्स का टीडीएस काटते समय Section 194C (कॉन्ट्रैक्टर), 194J (प्रोफेशनल फीस) या 194H (कमीशन) जैसे सेक्शंस का इस्तेमाल करते थे। नए एक्ट में इन सभी छिटपुट सेक्शंस को खत्म कर दिया गया है।

अब पूरे डोमेस्टिक टीडीएस स्ट्रक्चर को सिर्फ दो मुख्य हिस्सों में समेट दिया गया है:

  • Section 392: यह सेक्शन कर्मचारियों की सैलरी पर कटने वाले TDS (TDS on Salary) को गवर्न करता है।
  • Section 393: सैलरी के अलावा होने वाले अन्य सभी भुगतानों (Non-Salary Payments) को अब इस अकेले सेक्शन में शामिल किया गया है। इसके अंदर रेजिडेंट और नॉन-रेजिडेंट के लिए अलग-अलग कोड टेबल्स दी गई हैं।
अकाउंटेंट्स के लिए टिप: अब आपको सॉफ्टवेयर में अल्फा-न्यूमेरिक सेक्शंस (जैसे 194C) की जगह नंबर वाले पेमेंट कोड्स (Numeric Payment Codes 1001 से 1067) का इस्तेमाल करना होगा।

2. पुराने बनाम नए फॉर्म: पूरी लिस्ट (Comparison Table)

गूगल सर्च और पाठकों की सहूलियत के लिए नीचे दी गई टेबल में पुराने फॉर्म्स और उनके नए नामों की सीधी तुलना की गई है। इन्हें तुरंत नोट कर लें:

पुरानी व्यवस्था (1961 Act) नई व्यवस्था (2025 Act) फॉर्म का मुख्य उद्देश्य (Purpose)
Form 16 Form 130 कर्मचारियों को दिया जाने वाला वार्षिक सैलरी TDS सर्टिफिकेट
Form 16A Form 131 वेंडर्स और प्रोफेशनल्स के लिए त्रैमासिक (Quarterly) TDS सर्टिफिकेट
Form 15G / 15H Form 121 नील या लोअर डिडक्शन के लिए जमा की जाने वाली डिक्लेरेशन
Form 26A Form 149 टीडीएस न कटने पर दी जाने वाली सुधार रिपोर्ट

3. पेमेंट और डिपॉजिट के नए नियम: ITNS 281N चालान

हर महीने काटे गए टीडीएस को सरकारी खाते में जमा करने की प्रक्रिया को भी डिजिटल रूप से अपग्रेड किया गया है।

नया चालान फॉर्म: अब पुराना चालान ITNS 281 पूरी तरह बंद हो चुका है। इसकी जगह आपको ई-फाइलिंग पोर्टल पर नए ITNS 281N चालान का उपयोग करना होगा।

"Tax Year" की एंट्री: नए सिस्टम में 'Previous Year' (PY) और 'Assessment Year' (AY) के उलझाने वाले शब्दों को हटाकर सीधे "Tax Year" कर दिया गया है।

देरी पर पेनल्टी: टीडीएस जमा करने में देरी करने पर लगने वाला ब्याज पहले की तरह ही 1.5% प्रति महीना बना रहेगा। इसलिए समय पर भुगतान बेहद जरूरी है।

4. प्रैक्टिकल एक्जाम्पल: ट्रांजिशन पीरियड में टीडीएस कैसे काटें?

मान लीजिए आपकी कंपनी ने किसी वेंडर का ₹50,000 का इनवॉइस 31 मार्च को अपने सॉफ्टवेयर में बुक (Credit) किया, लेकिन उसका वास्तविक भुगतान (Payment) आप 15 अप्रैल को कर रहे हैं। ऐसे में टीडीएस किस नियम से कटेगा?

नियम: टीडीएस हमेशा 'बुकिंग या पेमेंट, जो भी पहले हो' के सिद्धांत पर काम करता है।

समाधान: चूंकि बुकिंग 31 मार्च को यानी पुराने साल में हो चुकी थी, इसलिए इस पर पुराने एक्ट (जैसे Sec 194C या 194J) के तहत ही टीडीएस कटेगा और रिटर्न जाएगा। 1 अप्रैल या उसके बाद जनरेट होने वाले सभी नए इनवॉइस पर ही नया कानून (Section 393) लागू होगा।

5. TRACES पोर्टल पर क्या असर पड़ेगा?

इनकम टैक्स विभाग का बैकएंड और TRACES यूटिलिटी अब पूरी तरह बदल चुके हैं। पोर्टल पर पुरानी चूकों को सुधारने की समय-सीमा को सीमित कर दिया गया है। अब आप बहुत पुराने सालों के करेक्शन स्टेटमेंट्स आसानी से फाइल नहीं कर पाएंगे, इसलिए अपने करंट डिफॉल्ट्स और शॉर्ट-डिटेक्शंस को तुरंत चेक करके क्लियर करें।

बिजनेस ओनर्स के लिए क्विक एक्शन प्लान:

  • अपने एकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर (Tally, Zoho Books, SAP आदि) को नए पेमेंट कोड्स के साथ अपडेट करें।
  • अपनी एकाउंट्स टीम को नए ITNS 281N चालान और फॉर्म नंबर्स (130, 131) की ट्रेनिंग दें।
  • वेंडर्स के साथ चल रहे पुराने एग्रीमेंट्स को बदलने की जरूरत नहीं है, बस नए बिलों की एंट्री नए नियमों के अनुसार करें।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। किसी भी टैक्स सम्बन्धी निर्णय से पहले अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या टैक्स सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।