Form 121: TDS Exemption Guide 2026

TDS नियमों में बड़ा बदलाव: अब 15G और 15H की जगह लें Form 121 का सहारा! 

1 अप्रैल, 2026 से भारत सरकार ने टैक्स कटौती (TDS) से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और अन्य आय पर TDS बचाने के लिए आपको अलग-अलग फॉर्म (15G/15H) भरने की जरूरत नहीं होगी। इनकी जगह अब एक नया 'Unified Form 121' पेश किया गया है।

क्या है Form 121?

यह एक एकीकृत (Unified) फॉर्म है जिसे फॉर्म 15G और 15H को हटाकर लागू किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 'Age-Neutral' है, यानी अब युवाओं और सीनियर सिटीजन्स, दोनों के लिए एक ही फॉर्म मान्य होगा।

Form 121 की मुख्य विशेषताएं (Key Features)

  • वन-स्टॉप सॉल्यूशन: यह पुराने फॉर्म 15G और 15H की जगह लेता है।
  • सबके लिए एक: यह फॉर्म निवासी व्यक्तियों (Resident Individuals), HUF और अन्य पात्र संस्थाओं पर लागू होता है।
  • विस्तृत दायरा: यह केवल FD ब्याज ही नहीं, बल्कि डिविडेंड (Dividends) और इंश्योरेंस कमीशन जैसी आय को भी कवर करता है।
  • PAN अनिवार्य: बिना PAN कार्ड के यह फॉर्म मान्य नहीं होगा।
  • वित्तीय वर्ष की वैधता: यह फॉर्म केवल उसी वित्तीय वर्ष के लिए वैध है जिसमें इसे जमा किया गया है।
  • अलग-अलग सबमिशन: यदि आपका पैसा अलग-अलग बैंकों या संस्थानों में है, तो आपको हर 'पेयर' (Payer) को अलग से फॉर्म देना होगा।

कौन कर सकता है आवेदन? (Eligibility)

आप Form 121 जमा कर सकते हैं यदि:

  • आपकी अनुमानित कुल वार्षिक आय टैक्स छूट की सीमा से कम है (नई व्यवस्था/New Regime के तहत ₹12 लाख तक)।
  • आपकी उस वित्तीय वर्ष के लिए शुद्ध टैक्स देनदारी (Tax Liability) 'शून्य' है।
  • आप एक निवासी व्यक्ति या HUF हैं (कंपनियों या फर्मों के लिए यह मान्य नहीं है)।

कैसे भरें Form 121? (Step-by-Step Guide)

  1. डाउनलोड: इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट या अपने बैंक के पोर्टल से Form 121 डाउनलोड करें।
  2. विवरण भरें: अपना नाम, PAN, आवासीय स्थिति (Residential Status) और अनुमानित आय की जानकारी सही-सही भरें।
  3. जमा करें: इसे अपने बैंक, पोस्ट ऑफिस या संबंधित संस्थान में जमा करें।
  4. रिकॉर्ड रखें: भविष्य के संदर्भ के लिए जमा किए गए फॉर्म की एक कॉपी अपने पास जरूर रखें।

जरूरी बातें जो याद रखनी हैं!

समय का ध्यान: TDS कटने से पहले ही फॉर्म जमा कर दें। अगर एक बार बैंक ने TDS काट लिया, तो फॉर्म जमा करने पर भी वो वापस नहीं मिलेगा (उसे आप केवल ITR फाइल करके ही रिफंड ले पाएंगे)।

रिपोर्टिंग: बैंकों और संस्थानों के लिए यह अनिवार्य है कि वे आपके Form 121 की जानकारी अपनी तिमाही (Quarterly) TDS रिटर्न में दें।

यदि आपकी आय टैक्स के दायरे में नहीं आती, तो आज ही अपनी बैंक शाखा से संपर्क करें और TDS की कटौती बचाएं!